शुक्रवार, 21 अगस्त 2009

वो पहला ख़त...


वो पहला ख़त

वो महज एक कागज का पुलिंदा भर नही था...
जिसमे उमडे थे तुम्हारे कई कई जज्बात...
कुछ कहे अनकहे
जिन्हें शब्दों में उडेलना वाकई मुश्किल था...
जिन्हें जैसे तैसे सहेज-समेत कर भेजा था तुमने...
आज भी उतना ही याद है मुझे...
वो तुम्हारा पहला ख़त आज भी ख़ास है मुझे..!!

3 टिप्‍पणियां:

  1. m speechless....touched..कुछ कहे अनकहे
    जिन्हें शब्दों में उडेलना वाकई मुश्किल था...

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  2. कुछ कहे अनकहे
    जिन्हें शब्दों में उडेलना वाकई मुश्किल था...
    वाकई कहे से ज्यादा अनकहे ही कह जाते है.

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  3. शुभमगलभावो सहीत बधाई एवम स्वागत!!!!
    आपकी लेखनी अच्छी लगी।
    BHAUT SUNDER LAGI

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